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पेट्रोल में आग क्यों और कब तक?

पेट्रोल डीज़ल के दाम पर खूब बवाल मचा है डिफेन्स से लेकर अटैक तक सब अपना अपना खेल रहे हैं पर असलियत बहुत ही कम लोग जानते हैं।

अधिकतर व्यक्तियों का डीज़ल पेट्रोल के खर्च और कमाई का एक अनुपात बना हुआ है। कई ग्राहक भुगतान कार्ड से करते हैं। अधिकतर एक बार में राउंड फ़िग्यर में 1,000, 1,500 या 2,000 का तेल या डीज़ल लेते हैं। नोटबंदी के बाद से 7.34 रुपये हर बार वापस आ जाते हैं। माह में तीन-पाँच बार ऐसे ही, यही खर्च है। अधिकतर व्यक्तियों का इससे ज्यादा तो नहीं लेकिन कम हो सकता है।

पर ये पोस्ट पेट्रोल डीज़ल के भाव को लेकर नहीं है बल्कि एक ऐसी बात को लेकर है जिस पर हमारे देश के अखबारी इकोनॉमिस्ट, रिपोर्टर, टीवी पर हर विषय के जानकार एंकर इत्यादि कभी कुछ नहीं बोलते। कारण स्पष्ट है कि या तो ये इनके एजेंडा में नहीं है या फिर इनके पास इतना दिमाग ही नहीं कि ये गूढ़ विषय समझ सके और आगे बता सकें।

हमारे देश में एक खास बात है और वो ये कि हम सब जानते हैं लेकिन मालूम कुछ नहीं है। भारत में कुछ बातें हैं जो कभी एक लाइन में नहीं समझी जातीं। लोगों को अंदरूनी सब कुछ जानना है…फोड़ा होगा तो खोदेंगे, नहीं होगा तो खरोंच के, खोद कर देखेंगे कि कैसे फोड़ा बनता है…

विडम्बना ये है कि साथ ही एक आम भारतीय का ये नेचर भी है कि मेरी बला से, जानने या न जानने से मेरा क्या फायदा? जानूँगा भी तो पूरा नहीं, अधूरा ही… और फिर उस पर चुटकुले भी बनाऊँगा। बहरहाल…

1990 में खाड़ी युद्ध के समय भारत ही नहीं पूरे विश्व के सामने तेल का बड़ा संकट आया था। तेल का दाम उस समय विश्व में सबसे अधिक स्तर पर था और उपलब्धता संकट में थी। भारत की अर्थव्यवस्था को भी बड़ी चोट पहुंची थी। किसी तरह पहला खाड़ी युद्ध ख़त्म हुआ और उसके बाद स्थिति ऐसे ही बनी रही।

फिर 1998 में जब अटल सरकार सत्ता में आई तब इस मामले पर गौर किया गया कि यदि खाड़ी युद्ध जैसा कोई संकट दोबारा आया तो उससे हम कैसे निबटें। तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री राम नाइक जी (जो आजकल उत्तर प्रदेश के राज्यपाल हैं) ने अटल जी के अगुवाई में 2003 में भारत में पेट्रोलियम रिज़र्व की योजना की रूपरेखा बनाई।

एक सार्वजनिक उपक्रम बनाने का बजट में लक्ष्य रखा गया जो इस उद्देश्य से तेल रिज़र्व बनाने पर काम करेगी। लगभग 4,038 करोड़ रुपए का बजट दिया गया जिससे विशाखापट्टनम और मंगलौर में कुल मिलकर लगभग 3 मिलियन मीट्रिक टन क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) सुरंगों में बने टैंक में जमा करने की परियोजना बनाई गई।

पर 2004 में अटल जी की सरकार को जनता ने विदा कर दिया। इस योजना के अंतर्गत बनने वाली कंपनी का नाम है ISPRL, यानी INDIAN STRATEGIC PETROLEUM RESERVES LIMITED. ये योजना बनी थी कि कम से कम 20 दिन के लिए 5.33 MMT (Million Metric Tonnes) क्रूड आयल स्टोर किया जाएगा।

मनमोहन सरकार ने इस योजना को जारी रखा और उन्होंने 10 दिन का रिज़र्व बनाने का लक्ष्य रखा लेकिन वो 10 वर्षों तक इसको पूरा नहीं कर सके।

2014 में फिर से इस पर तेज़ी से काम शुरू हुआ। मोदी के ताबड़तोड़ मिडिल ईस्ट के दौरे और पेट्रिलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की मेहनत रंग लाई और ISPRL ने न सिर्फ रिकॉर्ड समय में विशाखापत्नम और मंगलौर के रिज़र्व को पूरा किया, बल्कि ओडिसा के पाडुर में भी 1.5 MMT का रिज़र्व तैयार कर लिया।

इसी वर्ष मई में सारे रिज़र्व तैयार कर लिए गए है और इनमे लगभग 7 MMT क्रूड आयल स्टोर किया जा रहा है। मई 2018 से UAE सरकार की कंपनी ADNOC ने भारत को क्रूड आयल भेजना चालू किया और भारत 5.68 MMT क्रूड आयल इस वर्ष के अंत तक जमा कर लेगा। 7 MMT पूरा होने पर भारत के पास 25 दिन का क्रूड रिज़र्व उपलब्ध होगा।

 

 

अमेरिका ने भारत के इस क्रूड स्टोर बनाने के प्रोजेक्ट में पार्टनरशिप की बात की है और भारत इस पर उसके साथ strategic alliance कर सकता है। फिर इस बार 2017-18 के बजट में मोदी सरकार ने दो और क्रूड ऑयल स्टोरेज राजस्थान के बीकानेर और ओडिसा के चंडीखोल में बनाने का ऐलान किया।

इस सब पर कुछ पोर्टल ने खबर डाली।बस इतना कि क्रूड स्टोरिज बन रहा है, पुराना बन गया और तेल आ रहा है … बस इतना ही। किसी टीवी चैनल ने इस पर कोई खबर नहीं चलाई। प्रिंट मीडिया से भी गायब ही है।

मूल बात ये नहीं कि इतना बड़ा मामला भारत के मीडिया से गायब है। भारत में इस पर बात नहीं होगी जबकि विश्व मीडिया ने भारत के पास 25 दिन का क्रूड स्टॉक होते हुए और क्रूड स्टॉक बनाने के कारण और औचित्य पर काफी बहस की। NYT, WP, Global Times में खूब चर्चा हुई, चीन के Global Times ने इसको भारत का पागलपन तक करार दिया।

इस पूरे मामले पर सबसे बड़ी रिपोर्टिंग और अनुसन्धान के बाद लेख लिखा रूस के अख़बारों ने। रूस के स्पूतनिक ने इसको इस तरह बताया: “2015 से भारत में Crude Storage या यूँ कहें Crude Vault बनाने में अभूतपूर्व तेज़ी आई है और जिसका ये परिणाम हुआ कि भारत ने लगभग 7 MMT क्रूड स्टोर करने के लिए सुरंगीय भूटैंक बना लिए। उसके पास आपात स्थिति में अब 22 – 25 दिन तक दामों या उपलब्धता को लेकर कोई चिंता नहीं होगी। आज के समय कसी भी युद्ध या आपात स्थिति के हिसाब से ये समय पर्याप्त है। लेकिन मोदी ने इस वित्तीय वर्ष दो नए Crude Storage यूनिट बनाने का प्रोजेक्ट रखा है जिससे भारत और 2-3 MMT क्रूड आयल का रिज़र्व रख लेगा।”

आख़िरकार इसकी जरूरत क्या थी? जब इस पर स्पुतनिक के इकोनॉमिस्ट और संवाददाता ने रिसर्च की तो पाया कि भारत की इस सरकार ने कम से कम 2040 या शायद 2050 तक का सोचा हुआ है क्योंकि मोदी सरकार इस रफ़्तार से 2022 तक भारत में कम से कम 15 MMT का क्रूड स्टोरेज कर लेगी। पढ़िये स्पुत्निक़ का आगे क्या कहना है।

“यदि आकंड़ों को देखा जाए तो 2040 में भारत आज से कम से कम पांच गुना बड़ी इकॉनमी होगा।उस समय भारत को अपनी आवश्यकता के हिसाब से क्रूड की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती होगा।

हालाँकि 2040 तक सौर ऊर्जा और बिजली से चलने वाली गाड़ियों इत्यादि में विश्व तब तक काफी तरक्की कर चुका होगा लेकिन क्रूड की माँग बनी रहेगी और भारत इस पर काम कर रहा है। भारत ने पिछले 4-5 वर्षों में natural gas तथा सौर ऊर्जा में पूरी तरह और अब क्रूड में स्टोरेज की स्ट्रेटेजी द्वारा आत्मनिर्भर होने का कदम उठा लिया है।

भारत के बनाए जा रहे इन crude vaults में भारत न सिर्फ अपने क्रूड को रखने जा रहा है बल्कि अमेरिका, जापान, रूस, फ्रांस आदि जैसे देशों के लिए क्रूड स्टोरेज बैंक भी बना रहा है। भारत ने इन पाँच वर्षों में विश्व को अपनी मंशा जाता दी है।

भारत के ये crude vaults भारत को दुनिया में एक अलग स्थान देने जा रहे हैं। आने वाले समय में मोदी-जेटली के कार्यों पर और ध्यान दिया जाना चाहिए क्योंकि ये आज मजबूत नींव के साथ 2040 और अधिकतम 2050 तक विश्व के एक बड़े हिस्से को भारत पर निर्भर होने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं।”

ये ऊपर की रिपोर्ट मैंने नहीं लिखी है। हूबहू यही Sputnik ने फरवरी 2017 से लेकर मई 2018 तक के अनेकों लेखों में लिखा है। मैंने बस उधर से उठाया है। लिंक के लिए Sputnik पढ़ें। बाकी जिनको विश्वास है उनके लिए हम खुद ही लिंक हैं।

2004 के चुनाव में प्याज के दाम और “अटलजी के चेहरे” से ऊबी जनता को पता ही नहीं था कि ISPRL क्या है, उसको तो शाइनिंग इंडिया एक मज़ाक लग रहा था। उसके लिए शाइनिंग इंडिया तब एक चुटकुला था। आज भी अधिकतर को ISPRL या Crude Vault क्या है नहीं पता, लेकिन चुटकुलों पे खूब खिलखिला रहे हैं, मोदी जी पर जुमले और तंज ख़ूब कस रहे हैं।

– रंजय त्रिपाठी

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